Presentiment of own death



मृत्यु का पूर्वाभास
कई लोगोँ को मृत्यु पूर्वाभास होता हैँ। पराविज्ञान के अनुसार मृत्यु से पहले ही कुछ संकेतोँ की सहायता से व्यक्ति पहले ही यह जान सकता है कि उसकी मृत्यु होने वाली है। सामान्यत: मृत्यु से नौ महीने पहले ही संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं (अगर कोई व्यक्ति अपनी मां के गर्भ में दस महीने तक रहा है तो यह समय दस महीने हो सकता है और वैसे ही सात महीने रहने वाले व्यक्ति को सात महीने पहले ही संकेत मिलने लगते हैं).

ध्यान रहे कि मृत्यु के पूर्वाभास से जुड़े लक्षणों को किसी भी लैबटेस्ट या क्लिनिकल परीक्षण से सिद्ध नहीं किया जा सकता बल्कि ये लक्षण केवल उस व्यक्ति को महसूस होते हैं जिसकी मृत्यु होने वाली होती है। शास्त्रोँ मेँ ५० प्रकार के मृत्यु पूर्वाभास बताए गए हैँ। मृत्यु के पूर्वाभास से जुड़े कुछ संकेत निम्नलिखित हैं जो व्यक्ति को अपना अंत समय नजदीक होने का आभास करवाते हैं।

1. समय बीतने के साथ अगर कोई व्यक्ति अपनी नाक की नोक देखने में असमर्थ हो जाता है तो इसका अर्थ यही है कि जल्द ही उसकी मृत्यु होने वाली है. क्योंकि उसकी आंखें धीरे-धीरे ऊपर की ओर चढने लगती है और मृत्यु के समय आंखें पूरी तरह ऊपर की ओर चढ जाती हैं।

2. मृत्यु से कुछ समय पहले व्यक्ति को आसमान में मौजूद आकाशीय पिँड खंडित दिखने लगते हैँ। व्यक्ति को लगता है कि सब कुछ बीच में से दो भागों में बंटा हुआ है, जबकि ऐसा कुछ नहीं होता।

3. व्यक्ति को कान बंद करने के बाद सुनाई देने वाला अनाहत नाद सुनाई देना बंद हो जाता है ।

4. व्यक्ति को हर समय ऐसा लगता है कि उसके सामने कोई अनजाना धुंधला सा चेहरा बैठा है।

5. अगर मृत्यु हस्त नक्षत्र मेँ होने वाली हो तो अंत समय नजदीक आने पर एक पल के लिए व्यक्ति की परछाई उसका साथ छोड़ जाती है।

6. जीवन का सफर पूरा होने पर व्यक्ति को अपने मृत पूर्वजों के साथ रहने का अहसास होता है। किसी साये का हर समय साथ रहने जैसा आभास व्यक्ति को अपनी मृत्यु के दो-तीन पहले ही होने लगता है।

7. मृत्यु से पहले मानव शरीर में से अजीब सी गंध आने लगती है, जिसे मृत्यु गंध का नाम दिया जाता है।

8. दर्पण में व्यक्ति को अपना चेहरा ना दिख कर किसी और का चेहरा दिखाई देने लगे तो स्पष्ट तौर पर मृत्यु 24 घंटे के भीतर हो जाती है।

9. अगर आपके दोनोँ स्वर चलने लगेँ तो आपका अंत समय नजदीक है ये मानकर चलना चाहिए, व्यक्ति का हमेशा एक ही स्वर चलता है, अपनी नासिका के नीचे अपनी तर्जनी अंगुली पानी से भिगोकर रखेँ, आपको केवल एक ही नासिका छिद्र से ही वायु प्रवाह अनुभव होगा, इसे ही स्वर चलना कहते हैं। परन्तु मृत्यु के समय दोनोँ स्वर चलने लगते हैँ। नासिका के स्वर अव्यस्थित हो जाने का लक्षण अमूमन मृत्यु के 2-3 दिनों पूर्व प्रकट होता है।

पहले साधारण मनुष्य भी अपने साथ साथ दुसरो का पूर्व अनुमान आगे क्या होने वाला है लगा लेता था ! जब से सरस्वती नदी विलुप्त हुई तब से सुसुरुवा नाडी जो सीर के पीछे से उपर सीर के मध्य होती है सो गई है ! और इंसान पूर्वानुमान केवल अपना लगा सकता है दुसरो के लिए योग से नाडी को जगाना पड़ेगा अभी जाग जायेगी क्योकि सरस्वती अभी धरती के अंदर ही अंदर चलायें मान है !

मृत्‍यु की ठीक-ठीक भविष्‍यवाणी—पतंजलि ’सक्रिय व निष्‍क्रिय या लक्षणात्‍मक वह विलक्षणात्‍मक—इन दो प्रकार के कर्मों पर संयम पा लेने के बाद मृत्‍यु की ठीक-ठीक घड़ी की भविष्‍य सूचना पायी जा सकती है।‘’

मृत्‍यु के ठीक उतने ही महीने पहले हार में, नाभि चक्र में कुछ होने लगता है। हारा सेंटर को क्‍लिक होना ही पड़ता है। क्‍योंकि गर्भ में आने और जन्‍म के बीच नौ महीने का अंतराल था: जन्‍म लेने में नौ महीने का समय लगा, ठीक उतना ही समय मृत्‍यु के लिए लगेगा। जैसे जन्‍म लेने के पूर्व नौ महीने मां के गर्भ में रहकर तैयार होते हो, ठीक ऐसे ही मृत्‍यु की तैयारी में भी नौ महीने लगेंगे। फिर वर्तुल पूरा हो जायेगा। इसीलिये मृत्‍यु के नौ महीने पहले नाभि चक्र में कुछ होने लगता है। जो लोग जागरूक है, सजग है, वे तुरंत जान लेंगे कि नाभि चक्र में कुछ टूट गया है; और अब मृत्‍यु निकट ही है।




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